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Monday, 7 June, 2010

कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना...(कार्टून धमाका)


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18 comments:

  1. बहुत सुंदर

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  2. हे राम अब उसे भी काट लो ... लेकिन वोट???

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  3. बहुत ही बढ़िया व्यंग्य

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  4. हा हा!! बहुत सटीक!

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  5. वाकई में गला ही शेष है..

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  6. उफ्फ! सरकार भी टेलरिंग के धन्धे में. अब काट ही लो

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  7. और जेब?

    सबसे पहले तो वही कटी होगी.

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  8. सभी स्नेही टिपण्णी दाताओं का दिल से आभार..!

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  9. Great one ........kai logo ka to gala bhi nahi bacha ..........

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  10. बहुत सही .. कटने को गला ही रह गया है !!

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  11. घुट घुट के मरने से तो
    गला कटना ज्यादा अच्छा
    क्या कहना सुरेश भाई
    मार डाला

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  12. खंजर तने हुए हैं और सर झुके हुए हैं
    मकतल सा लग रहा है मंज़र तेरी गली में......

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  13. बहुत ही बढ़िया व्यंग्य
    HA HA HA HA HA HA

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  14. प्रिय माधव,
    तुमने मेरे ब्लॉग पर आकर टिपण्णी की..बहुत-बहुत आभार ! आते रहना !

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  15. बढ़िया है जी...
    आप का कहने का अन्दाज...
    बढ़िया व्यंग्य......

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