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Sunday 12 July 2009

दाल-रोटी पर आफत (कार्टून)

एक पुरानी फ़िल्म का गाना याद आ रहा है...दाल-रोटी खाओ प्रभु के गुन गाओ ! शायद उस ज़माने में गरीब को दाल-रोटी नसीब थी, लेकिन अगर हम आज की बात करें तो..गरीब की बात तो जाने दीजिये ..मध्यमवर्गीय की थाली से भी दाल-रोटी निकली जा रही है..दालों के भाव आसमान छु रहे हैं , हरी सब्जियों को बस दूर से निहारने के दिन आ गए हैं..ऐसे में खस्सी को खाने की सोचना भी बेईमानी की बात लगती है...देखिये कार्टून....

2 comments:

  1. khassi ?
    are waah suresh ji..
    bahut saalon baad ye shabd suna
    bahut hi accha laga..

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